Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.5.9: हे प्रिय राजन्, परमेश्वर वासुदेव पर निरन्तर ध्यान लगाते हुए तथा स्पष्ट और तार्किक बुद्धि का प्रयोग करके, अपनी आत्मा पर ध्यानपूर्वक विचार करो कि यह भौतिक शरीर के भीतर किस प्रकार स्थित है। | bhagavat अध्याय 12.5: महाराज परीक्षित को शुकदेव गोस्वामी का अन्तिम उपदेश । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवमात्मानमात्मस्थमात्मनैवामृश प्रभो ।
बुद्ध्यानुमानगर्भिण्या वासुदेवानुचिन्तया ॥ ९ ॥
अनुवाद
हे प्रिय राजन्, परमेश्वर वासुदेव पर निरन्तर ध्यान लगाते हुए तथा स्पष्ट और तार्किक बुद्धि का प्रयोग करके, अपनी आत्मा पर ध्यानपूर्वक विचार करो कि यह भौतिक शरीर के भीतर किस प्रकार स्थित है।
O King, constantly meditating on Lord Vasudeva and using pure and rational intelligence, carefully consider your soul as to how it is situated within the material body.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥