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श्लोक 12.4.8  |
सामुद्रं दैहिकं भौमं रसं सांवर्तको रवि: ।
रश्मिभि: पिबते घोरै: सर्वं नैव विमुञ्चति ॥ ८ ॥ |
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| अनुवाद |
| अपने संहारक रूप में सूर्य अपनी घोर किरणों से समुद्र, प्राणियों और पृथ्वी के समस्त जल को पी जाएगा। परंतु यह विनाशकारी सूर्य बदले में एक बूंद वर्षा भी नहीं करेगा। |
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| अपने संहारक रूप में सूर्य अपनी घोर किरणों से समुद्र, प्राणियों और पृथ्वी के समस्त जल को पी जाएगा। परंतु यह विनाशकारी सूर्य बदले में एक बूंद वर्षा भी नहीं करेगा। |
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