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श्लोक 12.4.43  |
इमां वक्ष्यत्यसौ सूत ऋषिभ्यो नैमिषालये ।
दीर्घसत्रे कुरुश्रेष्ठ सम्पृष्ट: शौनकादिभि: ॥ ४३ ॥ |
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| अनुवाद |
| हे कुरुश्रेष्ठ, हमारे सामने विराजित ये वही सूत गोस्वामी नैमिषारण्य में आयोजित विशाल यज्ञ में एकत्रित ऋषियों को यह भागवत सुनाएंगे। ऐसा वे तब करेंगे जब शौनक आदि सभा सदस्य उनसे प्रश्न करेंगे। |
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| हे कुरुश्रेष्ठ, हमारे सामने विराजित ये वही सूत गोस्वामी नैमिषारण्य में आयोजित विशाल यज्ञ में एकत्रित ऋषियों को यह भागवत सुनाएंगे। ऐसा वे तब करेंगे जब शौनक आदि सभा सदस्य उनसे प्रश्न करेंगे। |
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| इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध बारह के अंतर्गत चौथा अध्याय समाप्त होता है । |
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