श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 4: ब्रह्माण्ड के प्रलय की चार कोटियाँ  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.4.3 
तदन्ते प्रलयस्तावान् ब्राह्मी रात्रिरुदाहृता ।
त्रयो लोका इमे तत्र कल्पन्ते प्रलयाय हि ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा के एक दिन के बाद, उनकी रात के समय में, जो उतनी ही काल-अवधि की होती है, प्रलय होता है। उस समय तीनों लोकों का विनाश हो जाता है और वे नष्ट हो जाते हैं।
 
ब्रह्मा के एक दिन के बाद, उनकी रात के समय में, जो उतनी ही काल-अवधि की होती है, प्रलय होता है। उस समय तीनों लोकों का विनाश हो जाता है और वे नष्ट हो जाते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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