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श्लोक 12.4.10  |
उपर्यध: समन्ताच्च शिखाभिर्वह्निसूर्ययो: ।
दह्यमानं विभात्यण्डं दग्धगोमयपिण्डवत् ॥ १० ॥ |
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| अनुवाद |
| सभी तरफ से जला — ऊपर से चमकते सूरज से और नीचे से भगवान् संकर्षण की आग से — पूरा ब्रह्मांड जलते हुए गोबर के गोले की तरह चमकेगा। |
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| सभी तरफ से जला — ऊपर से चमकते सूरज से और नीचे से भगवान् संकर्षण की आग से — पूरा ब्रह्मांड जलते हुए गोबर के गोले की तरह चमकेगा। |
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