श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 9: पूर्ण वैराग्य  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  11.9.7 
सा तज्जुगुप्सितं मत्वा महती व्रीडिता तत: ।
बभञ्जैकैकश: शङ्खान् द्वौ द्वौ पाण्योरशेषयत् ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
उस लड़की को डर था कि ये भलेमानुस उसके परिवार को ग़रीब समझेंगे, क्योंकि उनकी बेटी चावल कूटने के मामूली काम में लगी हुई है। अत्यंत चतुर होने के कारण शर्मीली लड़की ने अपनी दोनों भुजाओं में पहनी शंख की चूड़ियों में से हर एक कलाई में केवल दो चूड़ियाँ छोड़कर बाकी सारी चूड़ियाँ तोड़ डालीं।
 
उस लड़की को डर था कि ये भलेमानुस उसके परिवार को ग़रीब समझेंगे, क्योंकि उनकी बेटी चावल कूटने के मामूली काम में लगी हुई है। अत्यंत चतुर होने के कारण शर्मीली लड़की ने अपनी दोनों भुजाओं में पहनी शंख की चूड़ियों में से हर एक कलाई में केवल दो चूड़ियाँ छोड़कर बाकी सारी चूड़ियाँ तोड़ डालीं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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