श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 9: पूर्ण वैराग्य  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  11.9.16 
एको नारायणो देव: पूर्वसृष्टं स्वमायया ।
संहृत्य कालकलया कल्पान्त इदमीश्वर: ।
एक एवाद्वितीयोऽभूदात्माधारोऽखिलाश्रय: ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मांड के स्वामी नारायण सम्पूर्ण जीवों के आराध्य ईश्वर हैं। वे किसी बाहरी सहायता के बिना ही अपनी शक्ति से इस ब्रह्मांड की सृष्टि करते हैं और प्रलय के समय वे काल के रूप में प्रकट होकर ब्रह्मांड का संहार करते हैं और सारे बंधे हुए जीवों सहित पूरे ब्रह्मांड को अपने में समेट लेते हैं। इस तरह उनका असीम आत्मा ही समस्त शक्तियों का आश्रय और भंडार है। सूक्ष्म प्रकृति, जो समूचे विशाल ब्रह्मांड का आधार है, भगवान के अंदर सिमट जाती है और इस तरह उनसे भिन्न नहीं होती। संहार होने पर वे अकेले ही रह जाते हैं।
 
ब्रह्मांड के स्वामी नारायण सम्पूर्ण जीवों के आराध्य ईश्वर हैं। वे किसी बाहरी सहायता के बिना ही अपनी शक्ति से इस ब्रह्मांड की सृष्टि करते हैं और प्रलय के समय वे काल के रूप में प्रकट होकर ब्रह्मांड का संहार करते हैं और सारे बंधे हुए जीवों सहित पूरे ब्रह्मांड को अपने में समेट लेते हैं। इस तरह उनका असीम आत्मा ही समस्त शक्तियों का आश्रय और भंडार है। सूक्ष्म प्रकृति, जो समूचे विशाल ब्रह्मांड का आधार है, भगवान के अंदर सिमट जाती है और इस तरह उनसे भिन्न नहीं होती। संहार होने पर वे अकेले ही रह जाते हैं।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd