श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 8: पिंगला की कथा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  11.8.39 
तेनोपकृतमादाय शिरसा ग्राम्यसङ्गता: ।
त्यक्त्वा दुराशा: शरणं व्रजामि तमधीश्वरम् ॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
मैं भक्तिभाव से उस महान उपकार को स्वीकार करती हूँ जो भगवान ने मुझ पर किये हैं। मैंने सामान्य इंद्रिय सुखों के लिए पापपूर्ण इच्छाओं को त्याग दिया है और अब मैं भगवान की शरण में हूँ।
 
मैं भक्तिभाव से उस महान उपकार को स्वीकार करती हूँ जो भगवान ने मुझ पर किये हैं। मैंने सामान्य इंद्रिय सुखों के लिए पापपूर्ण इच्छाओं को त्याग दिया है और अब मैं भगवान की शरण में हूँ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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