श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 8: पिंगला की कथा  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  11.8.36 
कियत् प्रियं ते व्यभजन् कामा ये कामदा नरा: ।
आद्यन्तवन्तो भार्याया देवा वा कालविद्रुता: ॥ ३६ ॥
 
 
अनुवाद
पुरुष स्त्रियों को इंद्रियों के सुख प्रदान करते हैं, किंतु ये सारे पुरुष, और यहाँ तक कि स्वर्ग के देवता भी, सबकी एक शुरुआत और अंत है। वे सब क्षणिक सृष्टियाँ हैं, जिन्हें समय अपने साथ बहा ले जाएगा। इसलिए इनमें से कोई भी अपनी पत्नियों को कितना वास्तविक आनंद या सुख दे सकता है?
 
पुरुष स्त्रियों को इंद्रियों के सुख प्रदान करते हैं, किंतु ये सारे पुरुष, और यहाँ तक कि स्वर्ग के देवता भी, सबकी एक शुरुआत और अंत है। वे सब क्षणिक सृष्टियाँ हैं, जिन्हें समय अपने साथ बहा ले जाएगा। इसलिए इनमें से कोई भी अपनी पत्नियों को कितना वास्तविक आनंद या सुख दे सकता है?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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