श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 8: पिंगला की कथा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  11.8.1 
श्रीब्राह्मण उवाच
सुखमैन्द्रियकं राजन् स्वर्गे नरक एव च ।
देहिनां यद् यथा दु:खं तस्मान्नेच्छेत तद् बुध: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
साधु ब्राह्मण ने कहा: हे राजन, देहधारी जीव स्वर्ग या नरक में अपने आप दुख का अनुभव करता है। इसी तरह बिना ढूँढ़े ही उसे सुख की भी प्राप्ति हो जाती है। इसलिए समझदार और विवेकी व्यक्ति ऐसे भौतिक सुख को पाने के लिए कभी कोई प्रयास नहीं करता।
 
साधु ब्राह्मण ने कहा: हे राजन, देहधारी जीव स्वर्ग या नरक में अपने आप दुख का अनुभव करता है। इसी तरह बिना ढूँढ़े ही उसे सुख की भी प्राप्ति हो जाती है। इसलिए समझदार और विवेकी व्यक्ति ऐसे भौतिक सुख को पाने के लिए कभी कोई प्रयास नहीं करता।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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