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श्लोक 11.6.23  |
अवतीर्य यदोर्वंशे बिभ्रद् रूपमनुत्तमम् ।
कर्माण्युद्दामवृत्तानि हिताय जगतोऽकृथा: ॥ २३ ॥ |
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| अनुवाद |
| आपने यदुवंश में अवतार लेकर अपना अद्वितीय दिव्य स्वरूप धारण किया है और संपूर्ण ब्रह्मांड के कल्याण हेतु आपने उदार दिव्य कृत्यों का निष्पादन किया है। |
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| आपने यदुवंश में अवतार लेकर अपना अद्वितीय दिव्य स्वरूप धारण किया है और संपूर्ण ब्रह्मांड के कल्याण हेतु आपने उदार दिव्य कृत्यों का निष्पादन किया है। |
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