श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 6: यदुवंश का प्रभास गमन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  11.6.22 
धर्मश्च स्थापित: सत्सु सत्यसन्धेषु वै त्वया ।
कीर्तिश्च दिक्षु विक्षिप्ता सर्वलोकमलापहा ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु, आपने धर्म के नियमों को फिर से स्थापित किया है, जहाँ सज्जनों का हमेशा से सत्य के साथ दृढ़ संबंध रहा है। आपने अपनी महिमा को भी संसार में फैलाया है, जिससे सारा संसार आपके बारे में सुनकर पवित्र हो सकता है।
 
O Lord, You have restored Dharma among the holy people who have always been firmly bound to the truth. You have also distributed Your fame throughout the world. In this way the whole world can be purified by hearing about You.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)