श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 6: यदुवंश का प्रभास गमन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  11.6.20 
श्रीबादरायणिरुवाच
इत्यभिष्टूय विबुधै: सेश: शतधृतिर्हरिम् ।
अभ्यभाषत गोविन्दं प्रणम्याम्बरमाश्रित: ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा : इस तरह जब ब्रह्माजी ने देवताओं के साथ मिलकर भगवान् गोविन्द की स्तुति की तो वे खुद आकाश में जा बैठे और उन्होंने भगवान् को इस प्रकार से सम्बोधित किया।
 
श्री शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा : इस तरह जब ब्रह्माजी ने देवताओं के साथ मिलकर भगवान् गोविन्द की स्तुति की तो वे खुद आकाश में जा बैठे और उन्होंने भगवान् को इस प्रकार से सम्बोधित किया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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