श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 5: नारद द्वारा वसुदेव को दी गई शिक्षाओं का समापन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  11.5.20 
श्रीकरभाजन उवाच
कृतं त्रेता द्वापरं च कलिरित्येषु केशव: ।
नानावर्णाभिधाकारो नानैव विधिनेज्यते ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
श्री करभाज़न ने उत्तर दिया- कृत, त्रेता, द्वापर और कलि इन चारों युगों में से प्रत्येक में भगवान केशव अलग-अलग वर्ण, नाम और रूपों में प्रकट होते हैं और विभिन्न विधियों से उनकी पूजा की जाती है।
 
श्री करभाज़न ने उत्तर दिया- कृत, त्रेता, द्वापर और कलि इन चारों युगों में से प्रत्येक में भगवान केशव अलग-अलग वर्ण, नाम और रूपों में प्रकट होते हैं और विभिन्न विधियों से उनकी पूजा की जाती है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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