श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 28: ज्ञान-योग  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  11.28.21 
न यत् पुरस्तादुत यन्न पश्चा-
न्मध्ये च तन्न व्यपदेशमात्रम् ।
भूतं प्रसिद्धं च परेण यद् यत्
तदेव तत् स्यादिति मे मनीषा ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
जो अतीत में नहीं था और भविष्य में भी नहीं रहेगा, उसका अपने अस्तित्व की अवधि में भी कोई अस्तित्व नहीं होता, वह केवल एक ऊपरी नाम होता है। मेरे विचार से जो कुछ भी बनाया जाता है और किसी अन्य वस्तु से प्रकट होता है वह अंततः केवल वही अन्य वस्तु होती है।
 
जो अतीत में नहीं था और भविष्य में भी नहीं रहेगा, उसका अपने अस्तित्व की अवधि में भी कोई अस्तित्व नहीं होता, वह केवल एक ऊपरी नाम होता है। मेरे विचार से जो कुछ भी बनाया जाता है और किसी अन्य वस्तु से प्रकट होता है वह अंततः केवल वही अन्य वस्तु होती है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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