vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् भागवतम
»
स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास
»
अध्याय 27: देवपूजा विषयक श्रीकृष्ण के आदेश
»
श्लोक 5
श्लोक
11.27.5
एतत् कमलपत्राक्ष कर्मबन्धविमोचनम् ।
भक्ताय चानुरक्ताय ब्रूहि विश्वेश्वरेश्वर ॥ ५ ॥
अनुवाद
हे कमलदल-नयन, हे ब्रह्मांड के समस्त ईश्वरों के परमेश्वर, कृपया अपने इस भक्त-दास को कर्म-बन्धन से मुक्ति का मार्ग बताइए।
O Lotus-eyed one, O God of all gods in the universe, please tell your devotee-servant the means of liberation from the bondage of karma.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×