श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 27: देवपूजा विषयक श्रीकृष्ण के आदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  11.27.5 
एतत् कमलपत्राक्ष कर्मबन्धविमोचनम् ।
भक्ताय चानुरक्ताय ब्रूहि विश्वेश्वरेश्वर ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
हे कमलदल-नयन, हे ब्रह्मांड के समस्त ईश्वरों के परमेश्वर, कृपया अपने इस भक्त-दास को कर्म-बन्धन से मुक्ति का मार्ग बताइए।
 
O Lotus-eyed one, O God of all gods in the universe, please tell your devotee-servant the means of liberation from the bondage of karma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)