| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास » अध्याय 26: ऐल-गीत » श्लोक 9 |
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| | | | श्लोक 11.26.9  | अहो मे आत्मसम्मोहो येनात्मा योषितां कृत: ।
क्रीडामृगश्चक्रवर्ती नरदेवशिखामणि: ॥ ९ ॥ | | | | | | अनुवाद | | हाय! यद्यपि मुझे शक्तिशाली सम्राट और समस्त राजाओं का मुकुट मणि माना जाता है, पर देख लो कि नारी के मोहपाश ने कैसे मुझे खिलौने जैसा पशु बना दिया है! | | | | हाय! यद्यपि मुझे शक्तिशाली सम्राट और समस्त राजाओं का मुकुट मणि माना जाता है, पर देख लो कि नारी के मोहपाश ने कैसे मुझे खिलौने जैसा पशु बना दिया है! | | ✨ ai-generated | | |
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