श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 26: ऐल-गीत  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  11.26.27 
सन्तोऽनपेक्षा मच्चित्ता: प्रशान्ता: समदर्शिन: ।
निर्ममा निरहङ्कारा निर्द्वन्द्वा निष्परिग्रहा: ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
मेरे भक्त अपने मनों को मुझ पर स्थिर रखते हैं और किसी भी भौतिक पदार्थ पर आश्रित नहीं रहते। वे हमेशा शांतिपूर्ण, समदृष्टि से संपन्न और ममता, अहंकार, द्वंद्व और लालच से रहित होते हैं।
 
मेरे भक्त अपने मनों को मुझ पर स्थिर रखते हैं और किसी भी भौतिक पदार्थ पर आश्रित नहीं रहते। वे हमेशा शांतिपूर्ण, समदृष्टि से संपन्न और ममता, अहंकार, द्वंद्व और लालच से रहित होते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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