श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 25: प्रकृति के तीन गुण तथा उनसे परे  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  11.25.7 
धर्मे चार्थे च कामे च यदासौ परिनिष्ठित: ।
गुणानां सन्निकर्षोऽयं श्रद्धारतिधनावह: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
जब कोई व्यक्ति धर्म, धन और भोग को अर्जित करता है, जो कुछ श्रद्धा, संपत्ति या भोग उसको प्राप्त होता है, वह प्रकृति के तीन गुणों के परस्पर क्रिया का परिणाम होता है।
 
जब कोई व्यक्ति धर्म, धन और भोग को अर्जित करता है, जो कुछ श्रद्धा, संपत्ति या भोग उसको प्राप्त होता है, वह प्रकृति के तीन गुणों के परस्पर क्रिया का परिणाम होता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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