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श्लोक 11.25.34  |
नि:सङ्गो मां भजेद् विद्वानप्रमत्तो जितेन्द्रिय: ।
रजस्तमश्चाभिजयेत् सत्त्वसंसेवया मुनि: ॥ ३४ ॥ |
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| अनुवाद |
| सभी भौतिक पदार्थों से मुक्त और मोह-माया से दूर रहने वाला विद्वान साधक अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखे और मेरी पूजा करे। उसे केवल सत्व गुण की वस्तुओं में ही लगा रहना चाहिए और रजोगुण और तमोगुण पर जीत हासिल करनी चाहिए। |
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| सभी भौतिक पदार्थों से मुक्त और मोह-माया से दूर रहने वाला विद्वान साधक अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखे और मेरी पूजा करे। उसे केवल सत्व गुण की वस्तुओं में ही लगा रहना चाहिए और रजोगुण और तमोगुण पर जीत हासिल करनी चाहिए। |
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