|
| |
| |
श्लोक 11.25.29  |
सात्त्विकं सुखमात्मोत्थं विषयोत्थं तु राजसम् ।
तामसं मोहदैन्योत्थं निर्गुणं मदपाश्रयम् ॥ २९ ॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| आत्म-सिद्ध सुख सात्विक है, इंद्रिय-सुख राजसिक है और भ्रम एवं अधोगति पर आधारित सुख तामसिक है। परंतु मेरे भीतर पाया जाने वाला सुख पारलौकिक है। |
| |
| आत्म-सिद्ध सुख सात्विक है, इंद्रिय-सुख राजसिक है और भ्रम एवं अधोगति पर आधारित सुख तामसिक है। परंतु मेरे भीतर पाया जाने वाला सुख पारलौकिक है। |
| ✨ ai-generated |
| |
|