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श्लोक 11.25.24  |
कैवल्यं सात्त्विकं ज्ञानं रजो वैकल्पिकं च यत् ।
प्राकृतं तामसं ज्ञानं मन्निष्ठं निर्गुणं स्मृतम् ॥ २४ ॥ |
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| अनुवाद |
| परम ज्ञान सात्त्विक स्वभाव का होता है। द्वैत भाव पर आधारित ज्ञान राजसिक होता है और मूर्खतापूर्ण भौतिक ज्ञान तामसिक होता है। किंतु जो ज्ञान मुझ पर आधारित होता है उसे दिव्य माना जाता है। |
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| परम ज्ञान सात्त्विक स्वभाव का होता है। द्वैत भाव पर आधारित ज्ञान राजसिक होता है और मूर्खतापूर्ण भौतिक ज्ञान तामसिक होता है। किंतु जो ज्ञान मुझ पर आधारित होता है उसे दिव्य माना जाता है। |
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