|
| |
| |
श्लोक 11.2.39  |
शृण्वन् सुभद्राणि रथाङ्गपाणे-
र्जन्मानि कर्माणि च यानि लोके ।
गीतानि नामानि तदर्थकानि
गायन् विलज्जो विचरेदसङ्ग: ॥ ३९ ॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| जो बुद्धिमान पुरुष अपने चित्त पर नियंत्रण रखता है और भय को जीत लेता है उसे पत्नी, परिवार, राष्ट्र आदि भौतिक वस्तुओं से सारा लगाव त्याग देना चाहिए और द्वंद्वों से मुक्त होकर चक्रधारी भगवान् के पवित्र नामों का श्रवण और कीर्तन करते हुए स्वतंत्रतापूर्वक विचरण करना चाहिए। कृष्ण के पवित्र नाम सर्वश्रेष्ठ और शुभ हैं क्योंकि वे उनके दिव्य जन्म और इस संसार में बद्ध आत्माओं के उद्धार के लिए उनके द्वारा किए जाने वाले कार्यों का वर्णन करते हैं। इस प्रकार भगवान् के पवित्र नामों का सम्पूर्ण विश्व में गायन किया जाता है। |
| |
| जो बुद्धिमान पुरुष अपने चित्त पर नियंत्रण रखता है और भय को जीत लेता है उसे पत्नी, परिवार, राष्ट्र आदि भौतिक वस्तुओं से सारा लगाव त्याग देना चाहिए और द्वंद्वों से मुक्त होकर चक्रधारी भगवान् के पवित्र नामों का श्रवण और कीर्तन करते हुए स्वतंत्रतापूर्वक विचरण करना चाहिए। कृष्ण के पवित्र नाम सर्वश्रेष्ठ और शुभ हैं क्योंकि वे उनके दिव्य जन्म और इस संसार में बद्ध आत्माओं के उद्धार के लिए उनके द्वारा किए जाने वाले कार्यों का वर्णन करते हैं। इस प्रकार भगवान् के पवित्र नामों का सम्पूर्ण विश्व में गायन किया जाता है। |
| ✨ ai-generated |
| |
|