तानहं तेऽभिधास्यामि देवव्रतमुखाच्छ्रुतान् ।
ज्ञानवैराग्यविज्ञानश्रद्धाभक्त्युपबृंहितान् ॥ १३ ॥
अनुवाद
अब मैं तुमसे वैदिक ज्ञान, विरक्ति, आत्म-अनुभूति, श्रद्धा और भक्ति के उन धार्मिक सिद्धांतों का वर्णन करूँगा जिन्हें भीष्मदेव ने स्वयं अपने मुख से सुना था।
Now I will describe to you the religious principles of Vedic knowledge, detachment, self-realization, faith and devotion that I heard from the mouth of Bhishmadeva.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥