श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 16: भगवान् की विभूतियाँ  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  11.16.9 
अहमात्मोद्धवामीषां भूतानां सुहृदीश्वर: ।
अहं सर्वाणि भूतानि तेषां स्थित्युद्भ‍वाप्यय: ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
हे उद्धव, मैं समस्त जीवों के हृदय में बसने वाला परमात्मा हूँ। इसलिए मैं स्वभाविक रूप से उनका शुभचिंतक और सर्वोच्च नियंत्रक हूँ। सृष्टि का निर्माण करने वाला, उसका पालन करने वाला और फिर उसे नष्ट करने वाला मैं ही हूँ, और मैं इन जीवों से अलग नहीं हूँ।
 
हे उद्धव, मैं समस्त जीवों के हृदय में बसने वाला परमात्मा हूँ। इसलिए मैं स्वभाविक रूप से उनका शुभचिंतक और सर्वोच्च नियंत्रक हूँ। सृष्टि का निर्माण करने वाला, उसका पालन करने वाला और फिर उसे नष्ट करने वाला मैं ही हूँ, और मैं इन जीवों से अलग नहीं हूँ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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