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श्लोक 11.16.8  |
स तदा पुरुषव्याघ्रो युक्त्या मे प्रतिबोधित: ।
अभ्यभाषत मामेवं यथा त्वं रणमूर्धनि ॥ ८ ॥ |
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| अनुवाद |
| उस काल में मैंने पुरुषों में श्रेष्ठ अर्जुन को तर्कों से समझाया था और युद्ध भूमि में ही अर्जुन ने मुझसे उसी प्रकार प्रश्न किए थे जिस प्रकार तुम अब पूछ रहे हो। |
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| उस काल में मैंने पुरुषों में श्रेष्ठ अर्जुन को तर्कों से समझाया था और युद्ध भूमि में ही अर्जुन ने मुझसे उसी प्रकार प्रश्न किए थे जिस प्रकार तुम अब पूछ रहे हो। |
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