श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 16: भगवान् की विभूतियाँ  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  11.16.5 
या: काश्च भूमौ दिवि वै रसायां
विभूतयो दिक्षु महाविभूते ।
ता मह्यमाख्याह्यनुभावितास्ते
नमामि ते तीर्थपदाङ्‍‍घ्रिपद्मम् ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
हे सर्वशक्तिमान प्रभु, कृपा करके मुझे अपनी वे अनगिनत शक्तियाँ बतलायें जिन्हें आप पृथ्वी, स्वर्ग, नरक और सभी दिशाओं में प्रकट करते हैं। मैं आपके उन चरणकमलों को नमन करता हूँ जो समस्त तीर्थस्थलों के आश्रय हैं।
 
हे सर्वशक्तिमान प्रभु, कृपा करके मुझे अपनी वे अनगिनत शक्तियाँ बतलायें जिन्हें आप पृथ्वी, स्वर्ग, नरक और सभी दिशाओं में प्रकट करते हैं। मैं आपके उन चरणकमलों को नमन करता हूँ जो समस्त तीर्थस्थलों के आश्रय हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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