| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास » अध्याय 16: भगवान् की विभूतियाँ » श्लोक 38 |
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| | | | श्लोक 11.16.38  | मयेश्वरेण जीवेन गुणेन गुणिना विना ।
सर्वात्मनापि सर्वेण न भावो विद्यते क्वचित् ॥ ३८ ॥ | | | | | | अनुवाद | | जीव, प्रकृति के गुणों और महत्-तत्त्व के मूल के रूप में परमेश्वर मैं ही हूँ। इसलिए, मैं सब कुछ हूँ और मेरे बिना कुछ भी अस्तित्व में नहीं रह सकता। | | | | जीव, प्रकृति के गुणों और महत्-तत्त्व के मूल के रूप में परमेश्वर मैं ही हूँ। इसलिए, मैं सब कुछ हूँ और मेरे बिना कुछ भी अस्तित्व में नहीं रह सकता। | | ✨ ai-generated | | |
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