श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 16: भगवान् की विभूतियाँ  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  11.16.32 
ओज: सहो बलवतां कर्माहं विद्धि सात्वताम् ।
सात्वतां नवमूर्तीनामादिमूर्तिरहं परा ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
शक्तिशालियों में मैं शारीरिक और मानसिक बल हूं और अपने भक्तों की भक्तिमय कर्म हूं। मेरे भक्त मेरी पूजा नौ अलग-अलग रूपों में करते हैं जिनमें से मैं मूल और प्राथमिक वासुदेव हूं।
 
शक्तिशालियों में मैं शारीरिक और मानसिक बल हूं और अपने भक्तों की भक्तिमय कर्म हूं। मेरे भक्त मेरी पूजा नौ अलग-अलग रूपों में करते हैं जिनमें से मैं मूल और प्राथमिक वासुदेव हूं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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