श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 16: भगवान् की विभूतियाँ  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  11.16.24 
योगानामात्मसंरोधो मन्त्रोऽस्मि विजिगीषताम् ।
आन्वीक्षिकी कौशलानां विकल्प: ख्यातिवादिनाम् ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
योग की आठ उत्तरोत्तर अवस्थाओं में से मैं अंतिम अवस्था हूँ, जिसे समादि कहते हैं। समादि में आत्मा पूरी तरह से मोह से मुक्त हो जाती है। जीतने वालों में मैं बुद्धिमान राजनीतिक सलाहकार हूँ और विवेकशील लोगों के बीच मैं आत्मज्ञान हूँ, जिससे व्यक्ति आत्मा और पदार्थ में अंतर कर सकता है। सभी दार्शनिकों में मैं अनुभूति की विविधता हूँ।
 
योग की आठ उत्तरोत्तर अवस्थाओं में से मैं अंतिम अवस्था हूँ, जिसे समादि कहते हैं। समादि में आत्मा पूरी तरह से मोह से मुक्त हो जाती है। जीतने वालों में मैं बुद्धिमान राजनीतिक सलाहकार हूँ और विवेकशील लोगों के बीच मैं आत्मज्ञान हूँ, जिससे व्यक्ति आत्मा और पदार्थ में अंतर कर सकता है। सभी दार्शनिकों में मैं अनुभूति की विविधता हूँ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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