श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 16: भगवान् की विभूतियाँ  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  11.16.2 
उच्चावचेषु भूतेषु दुर्ज्ञेयमकृतात्मभि: ।
उपासते त्वां भगवन् याथातथ्येन ब्राह्मणा: ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु, हालाँकि दुष्ट लोगों के लिए यह समझना कठिन है कि आप सभी श्रेष्ठ और निम्न रचनाओं में स्थित हैं, परंतु वे ब्राह्मण जो वास्तव में वैदिक निष्कर्षों को जानते हैं, वे यथार्थ में आपकी आराधना करते हैं।
 
हे प्रभु, हालाँकि दुष्ट लोगों के लिए यह समझना कठिन है कि आप सभी श्रेष्ठ और निम्न रचनाओं में स्थित हैं, परंतु वे ब्राह्मण जो वास्तव में वैदिक निष्कर्षों को जानते हैं, वे यथार्थ में आपकी आराधना करते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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