श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 16: भगवान् की विभूतियाँ  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  11.16.18 
उच्चै:श्रवास्तुरङ्गाणां धातूनामस्मि काञ्चनम् ।
यम: संयमतां चाहम् सर्पाणामस्मि वासुकि: ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
घोड़ों में मैं उच्चैश्रवा तथा धातुओं में सोना हूँ। दंड देने वालों तथा दमन करने वालों में मैं यमराज हूँ और सर्पों में वासुकि हूँ।
 
घोड़ों में मैं उच्चैश्रवा तथा धातुओं में सोना हूँ। दंड देने वालों तथा दमन करने वालों में मैं यमराज हूँ और सर्पों में वासुकि हूँ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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