श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 15: भगवान् कृष्ण द्वारा योग-सिद्धियों का वर्णन  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  11.15.6-7 
अनूर्मिमत्त्वं देहेऽस्मिन् दूरश्रवणदर्शनम् ।
मनोजव: कामरूपं परकायप्रवेशनम् ॥ ६ ॥
स्वच्छन्दमृत्युर्देवानां सहक्रीडानुदर्शनम् ।
यथासङ्कल्पसंसिद्धिराज्ञाप्रतिहता गति: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
प्रकृति के गुणों से उत्पन्न होने वाली दस प्रमुख सिद्धियाँ हैं—भूख-प्यास और अन्य शारीरिक परेशानियों से मुक्त होने की क्षमता, बहुत दूर की चीजों को देखने-सुनने की क्षमता, मन की गति से शरीर को हिलाने की क्षमता, इच्छानुसार कोई भी रूप लेने की क्षमता, दूसरों के शरीर में प्रवेश करने की क्षमता, इच्छानुसार शरीर त्यागने की क्षमता, देवताओं और अप्सराओं के मनोरंजन को देखने की क्षमता, अपने संकल्प को पूरा करने की क्षमता और ऐसे आदेश देने की क्षमता जिसका पालन बिना किसी बाधा के किया जा सके।
 
प्रकृति के गुणों से उत्पन्न होने वाली दस प्रमुख सिद्धियाँ हैं—भूख-प्यास और अन्य शारीरिक परेशानियों से मुक्त होने की क्षमता, बहुत दूर की चीजों को देखने-सुनने की क्षमता, मन की गति से शरीर को हिलाने की क्षमता, इच्छानुसार कोई भी रूप लेने की क्षमता, दूसरों के शरीर में प्रवेश करने की क्षमता, इच्छानुसार शरीर त्यागने की क्षमता, देवताओं और अप्सराओं के मनोरंजन को देखने की क्षमता, अपने संकल्प को पूरा करने की क्षमता और ऐसे आदेश देने की क्षमता जिसका पालन बिना किसी बाधा के किया जा सके।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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