श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 13: हंसावतार द्वारा ब्रह्मा-पुत्रों के प्रश्नों के उत्तर  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  11.13.27 
जाग्रत् स्वप्न: सुषुप्तं च गुणतो बुद्धिवृत्तय: ।
तासां विलक्षणो जीव: साक्षित्वेन विनिश्चित: ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
जागना, सोना और गहरी नींद - बुद्धि के ये तीन कार्य प्रकृति के गुणों द्वारा उत्पन्न होते हैं। शरीर के अंदर रहने वाली आत्मा इन तीनों अवस्थाओं से अलग लक्षणों द्वारा पहचानी जाती है, इसीलिए वह इनकी साक्षी बनी रहती है।
 
जागना, सोना और गहरी नींद - बुद्धि के ये तीन कार्य प्रकृति के गुणों द्वारा उत्पन्न होते हैं। शरीर के अंदर रहने वाली आत्मा इन तीनों अवस्थाओं से अलग लक्षणों द्वारा पहचानी जाती है, इसीलिए वह इनकी साक्षी बनी रहती है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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