श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 10: सकाम कर्म की प्रकृति  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  11.10.24 
स्वपुण्योपचिते शुभ्रे विमान उपगीयते ।
गन्धर्वैर्विहरन् मध्ये देवीनां हृद्यवेषधृक् ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ग प्राप्ति के बाद यज्ञ करने वाले व्यक्ति को चमचमाता वायुयान प्राप्त होता है, जिसका उपयोग कर वह यात्राएं करता है। यह वायुयान उसे पृथ्वी पर किए गए पुण्यकर्मों का फल है। वह वायुयान में सुंदर वस्त्र पहने हुए तथा गंधर्वों द्वारा यशोगान करते हुए स्वर्ग की देवियों से घिरा हुआ जीवन का आनंद लेता है।
 
After reaching heaven, the person who performs the yajna travels in a glittering aeroplane, which he gets as a result of his good deeds on earth. He enjoys life being praised by the Gandharvas and surrounded by the goddesses of heaven dressed in extremely attractive clothes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)