भगवान के रथ ने मध्यवर्ती विश्व के सात द्वीपों, जिनके अपने-अपने समुद्र और सात-सात मुख्य पर्वत थे, के ऊपर से प्रस्थान किया। तदोपरांत उस रथ ने लोकालोक की सीमा को पार किया और पूर्ण अंधकार के विस्तृत क्षेत्र में प्रवेश किया।
The Lord's chariot passed over the seven islands of the middle universe, which had their own oceans and seven main mountains. Then the chariot crossed the Lokaloka boundary and entered a vast region of total darkness.
तात्पर्य
श्रील प्रभुपाद कृष्ण, भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व में उल्लेख करते हैं: "कृष्ण इन सभी ग्रहों से ऊपर उठे और ब्रह्मांड के आवरण तक पहुँचे। श श्रीमद्-भागवतम में इस आवरण को महान अंधकार के रूप में वर्णित किया गया है। समग्र रूप से इस भौतिक संसार को अंधेरे के रूप में वर्णित किया गया है। खुले स्थान में सूर्य का प्रकाश होता है, और इसलिए यह प्रकाशित होता है, लेकिन आवरण में सूर्य के प्रकाश की अनुपस्थिति के कारण यह स्वाभाविक रूप से अंधेरा होता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥