श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  10.89.46 
इति सम्भाष्य भगवानर्जुनेन सहेश्वर: ।
दिव्यं स्वरथमास्थाय प्रतीचीं दिशमाविशत् ॥ ४६ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने अर्जुन को समझाकर अपने दिव्य रथ में स्थान दिया और दोनों साथ में पश्चिम की ओर निकल पड़े।
 
Having thus advised Arjuna, the Lord made him sit in his Daivaratha and together they departed towards the west.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)