वहाँ ब्राह्मण-पुत्र को न देखकर अर्जुन अग्नि, निर्ऋति, सोम, वायु और वरुण की पुरियों में गया। हथियार तैयार रखे हुए उसने अधोलोक से लेकर स्वर्ग के ऊपर तक ब्रह्माण्ड के सारे प्रदेशों को खोज मारा। अंत में ब्राह्मण के पुत्र को कहीं भी न पाकर, अर्जुन ने अपना वायदा पूरा न करने के कारण पवित्र अग्नि में प्रवेश करने का निर्णय लिया। किन्तु जब वह ऐसा करने जा ही रहा था, तब भगवान् कृष्ण ने उसे रोक लिया और उससे निम्नलिखित शब्द कहे।
Not finding the brahmin's son there, Arjuna went to the cities of Agni, Nirriti, Soma, Vayu and Varuna. With weapon ready in his hand, he searched all the regions of the universe from the netherworld to the heavenlies. Finally, not finding the brahmin's son anywhere, Arjuna decided to enter the sacred fire as he had not fulfilled his promise. But as he was about to do so, Lord Krishna stopped him and spoke the following words to him.
तात्पर्य
श्रीला विश्वनाथ चक्रवर्ती का कहना है कि अर्जुन ने भगवान शिव पर अपने गुरु के रूप में पूर्ण भरोसा किया, इसलिए उन्होंने भगवान शिव के दिव्य निवास की खोज में प्रयास नहीं किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥