एवं शपति विप्रर्षौ विद्यामास्थाय फाल्गुन: ।
ययौ संयमनीमाशु यत्रास्ते भगवान् यम: ॥ ४२ ॥
अनुवाद
जब बुद्धिमान ब्राह्मण उसका अपमान करते हुए भला-बुरा कह रहे थे, तो अर्जुन ने तुरंत ही योगविद्या का उपयोग करके स्वर्गलोक की नगरी संयमनी पुरी की ओर जाने का निश्चय किया जहाँ यमराज विराजमान हैं।
When that wise Brahmin was abusing and insulting Arjuna, Arjuna immediately used the knowledge of Yoga to go to Sanyamani Puri, where Yamaraja resides.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥