श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  10.89.37 
न्यरुणत् सूतिकागारं शरैर्नानास्‍त्रयोजितै: ।
तिर्यगूर्ध्वमध: पार्थश्चकार शरपञ्जरम् ॥ ३७ ॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने विविध प्रक्षेपास्त्रों से लगे बाणों से उस सौरी-गृह को घेर दिया। इस तरह पृथा- पुत्र ने बाणों का एक सुरक्षात्मक पिंजरा बना कर उस गृह को ऊपर से, नीचे से तथा अगल बगल से आच्छादित कर दिया।
 
Arjuna surrounded the solar house with arrows fitted with various projectiles. In this way, the son of Pritha formed a protective cage of arrows and covered the house from top, bottom and sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)