श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  10.89.32 
श्रीअर्जुन उवाच
नाहं सङ्कर्षणो ब्रह्मन् न कृष्ण: कार्ष्णिरेव च ।
अहं वा अर्जुनो नाम गाण्डीवं यस्य वै धनु: ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
श्री अर्जुन ने कहा: हे ब्राह्मण, मैं संकर्षण नहीं हूँ, कृष्ण नहीं हूँ और कृष्ण का पुत्र भी नहीं हूँ, बल्कि मैं गाण्डीव धनुष धारण करने वाला अर्जुन हूँ।
 
Sri Arjuna said: O Brahmin, I am neither Sankarshana nor Krishna nor Krishna's son, rather I am Arjuna, the bearer of the Gandiva bow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)