श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  10.89.3 
न तस्मै प्रह्वणं स्तोत्रं चक्रे सत्त्वपरीक्षया ।
तस्मै चुक्रोध भगवान् प्रज्वलन् स्वेन तेजसा ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी की सतोगुण स्थिति की परीक्षा लेने के लिए भृगु ने उन्हें न प्रणाम किया और न ही स्तुति के साथ उनका महिमामंडन किया। इससे ब्रह्माजी स्वयं के भाव प्रवाह में बहकर कुपित हो उठे।
 
To test the extent to which Brahmaji had attained Satva Guna, Bhrigu neither bowed to him nor praised him through his own praises. So Brahmaji, being enraged by his own emotions, became angry with Bhrigu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)