श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  10.89.28 
धनदारात्मजापृक्ता यत्र शोचन्ति ब्राह्मणा: ।
ते वै राजन्यवेषेण नटा जीवन्त्यसुम्भरा: ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
“जिस राज्य में ब्राह्मण अपनी खोई हुई संपत्ति, पत्नियों और बच्चों के लिए विलाप करते हैं, उसके राजा केवल धोखेबाज हैं जो अपनी आजीविका चलाने के लिए राजाओं का नाटक करते हैं।”
 
"In a state where brahmins mourn for their lost property, wives and children, its rulers are mere deceivers who pretend to be kings in order to feed themselves."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)