तस्य जिज्ञासया ते वै भृगुं ब्रह्मसुतं नृप ।
तज्ज्ञप्त्यै प्रेषयामासु: सोऽभ्यगाद् ब्रह्मण: सभाम् ॥ २ ॥
अनुवाद
हे राजन, इस प्रश्न का हल ढूँढ़ निकालने के लिए उत्सुक मुनियों ने ब्रह्मा के पुत्र भृगु को उत्तर खोजने के लिए भेजा। प्रथम में, वे अपने पिता के दरबार में गए।
O King, the sages desirous of finding a solution to this question sent Bhrigu, the son of Brahma, to seek the answer. He first went to the court of his father, Brahma.
तात्पर्य
जैसा कि श्रील प्रभुपाद ने कृष्ण, परम देवता में बताया है: "ऋषियों द्वारा तय की गई योजना भृगु के लिए यह परिक्षण करने के लिए थी कि कौन सी प्रमुख देवताओं में गुणवत्ता अच्छाई से भरपूर है।" जो सतोगुण में है, उसके पास सहनशीलता और समभाव जैसे गुण होते हैं, जबकि जो रजोगुण और तमोगुण द्वारा संचालित होते हैं, वे आसानी से अपना आपा खो देते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥