श्रीशुक उवाच
सरस्वत्यास्तटे राजन्नृषय: सत्रमासत ।
वितर्क: समभूत्तेषां त्रिष्वधीशेषु को महान् ॥ १ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा : हे राजन्, एक बार सरस्वती नदी के किनारे ऋषियों का एक समूह वैदिक यज्ञ कर रहा था। तब उनके बीच यह विवाद खड़ा हो गया कि तीन मुख्य देवी-देवताओं में श्रेष्ठ कौन है।
Sukadeva Goswami said: O King, once when a group of sages were performing Vedic sacrifices on the banks of the river Sarasvati, a debate arose among them as to who was the best among the three main gods.
तात्पर्य
हिंदू धर्म की त्रिमूर्ति में विष्णु, ब्रह्मा और शिव हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥