Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.88.3: श्रीशुकदेव ने कहा: शिवजी सदैव अपनी निजी शक्ति, प्रकृति के साथ एकीकृत रहते हैं। प्रकृति के तीन गुणों की विनती पर स्वयं को तीन रूपों में प्रकट करते हुए वे सत्व, रज और तम गुणों के त्रिगुणात्मक सिद्धांत को धारण करते हैं। | bhagavat अध्याय 10.88: वृकासुर से शिवजी की रक्षा । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीशुकदेव ने कहा: शिवजी सदैव अपनी निजी शक्ति, प्रकृति के साथ एकीकृत रहते हैं। प्रकृति के तीन गुणों की विनती पर स्वयं को तीन रूपों में प्रकट करते हुए वे सत्व, रज और तम गुणों के त्रिगुणात्मक सिद्धांत को धारण करते हैं।
Sri Shukdev said: Lord Shiva is always united with his personal power, nature. Manifesting himself in three forms at the request of the three gunas of nature, he is the possessor of the trinity of Satva, Rajo and Tamoguṇī ego.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥