Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.88.22: यह सुनकर भगवान् रुद्र कुछ परेशान से लगे। फिर भी हे भारतवंशी, उन्होंने अपनी सहमति के लिए ॐ का उच्चारण किया और मुस्कुराते हुए वृक को आशीर्वाद दिया, मानो किसी विषैले साँप को दूध पिला रहे हों। | bhagavat अध्याय 10.88: वृकासुर से शिवजी की रक्षा । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तच्छ्रुत्वा भगवान् रुद्रो दुर्मना इव भारत ।
ॐ इति प्रहसंस्तस्मै ददेऽहेरमृतं यथा ॥ २२ ॥
अनुवाद
यह सुनकर भगवान् रुद्र कुछ परेशान से लगे। फिर भी हे भारतवंशी, उन्होंने अपनी सहमति के लिए ॐ का उच्चारण किया और मुस्कुराते हुए वृक को आशीर्वाद दिया, मानो किसी विषैले साँप को दूध पिला रहे हों।
Hearing this, Lord Rudra seemed somewhat perturbed. Yet, O Bharata, he uttered ॐ to show his consent and with a sarcastic smile granted the boon to Vrik, as if he had given milk to a poisonous serpent.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥