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bhagavat 10.86.56: मेरा साक्षात्कार प्राप्त कर लेने के कारण ब्राह्मण इस ज्ञान में अटल रहता है कि इस ब्रह्माण्ड की समस्त चेतन और जड़ वस्तुएँ तथा इसकी सृष्टि के मूल तत्व भी, मेरे ही द्वारा विस्तारित हुए प्रकट रूप हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  10.86.56 
चराचरमिदं विश्वं भावा ये चास्य हेतव: ।
मद्रूपाणीति चेतस्याधत्ते विप्रो मदीक्षया ॥ ५६ ॥
 
 
अनुवाद
मेरा साक्षात्कार प्राप्त कर लेने के कारण ब्राह्मण इस ज्ञान में अटल रहता है कि इस ब्रह्माण्ड की समस्त चेतन और जड़ वस्तुएँ तथा इसकी सृष्टि के मूल तत्व भी, मेरे ही द्वारा विस्तारित हुए प्रकट रूप हैं।
 
Having realized Me, the Brahman remains stable in the knowledge that all the animate and inanimate objects of this universe, and even the basic elements of its creation, are manifestations emanating from Me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)