Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.86.53: पहले से ही ब्राह्मण इस जगत् में समस्त जीवों में श्रेष्ठ होता है, किन्तु जब वह तप, विद्या और आत्म संतोष से युक्त होता है, तब वह और भी उच्च स्थान पर होता है। यदि वह मेरी भक्ति करे, तो फिर कहना ही क्या। | bhagavat अध्याय 10.86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पहले से ही ब्राह्मण इस जगत् में समस्त जीवों में श्रेष्ठ होता है, किन्तु जब वह तप, विद्या और आत्म संतोष से युक्त होता है, तब वह और भी उच्च स्थान पर होता है। यदि वह मेरी भक्ति करे, तो फिर कहना ही क्या।
A Brahmin is the best among all the creatures in this world by his birth, but he becomes even more superior when he is endowed with austerity, knowledge and self-satisfaction. If he has devotion towards me, then what more can be said.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥