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bhagavat 10.86.49: हे प्रभु, आप सर्वोच्च आत्मा हैं और हम आपके सेवक हैं। हम आपकी सेवा कैसे कर सकते हैं? हे प्रभु, आपको देखते ही मानव जीवन की सभी परेशानियाँ समाप्त हो जाती हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  10.86.49 
स त्वं शाधि स्वभृत्यान् न: किं देव करवाम हे ।
एतदन्तो नृणां क्लेशो यद् भवानक्षिगोचर: ॥ ४९ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु, आप सर्वोच्च आत्मा हैं और हम आपके सेवक हैं। हम आपकी सेवा कैसे कर सकते हैं? हे प्रभु, आपको देखते ही मानव जीवन की सभी परेशानियाँ समाप्त हो जाती हैं।
 
O Lord, you are the Supreme Being and we are your servants. How should we serve you? O Lord, all the sufferings of human life come to an end just by seeing you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)